अभी 4 दिसंबर, शनिवार के दिन अमावस्या तिथि होते साथ विशेष बात यह है कि इस दिन शनिदेव का नक्षत्र अनुराधा भी विद्यमान रहेगा जो सुबह 10 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या हवन-पूजा, श्राद्ध, तर्पण एवं पितरों की आत्मा की शांति के लिये सर्वश्रेष्ठ दिन माना गया है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार शनिदेव का जन्म अमावस्या तिथि को शनिवार के दिन हुआ था। इसलिए शनि अमावस्या का ये संयोग शनिदेव को प्रसन्न करने एवं शनिदोषों से मुक्ति पाने का एक विशेष अवसर है।
इस दिन कुछ ज्योतिषीय एवं धार्मिक उपाय करने से शनि व पितृ दोषों की शांति होती है और इन सबसे सरल व अचूक उपाय गौमाता की सेवा और गौग्राश के लिये दान बताया गया है।
अतः सभी जनो से अनुरोध है कि अपने जीवन मे शनिदेव की सदैव कृपा पाने के लिये विशेषतः जखमी, बिमार, तथा बगैर दूध देनेवाले गोष्ट सेवालय मे अपनी सेवा जरूर समर्पित किजीये।
साक्षात बेजूबान प्राणी के माध्यम से ईश्वर सेवा समर्पित किजीये ।
'जय गोमाता '
दिलीप कुलकर्णी

