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इंडियन मेडिकल एसोसिएशनराष्ट्रीय अध्यक्ष जी की कलम से डॉक्टर न्याय चाहते हैं!


आजादी के सत्तर साल बाद भी इस देश में डॉक्टरों को मार और अन्याय सहना पड़ता है. देश के नागरिकों की जीवन प्रत्याशा 27 से बढ़कर 70 वर्ष हो गई और शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में आशाजनक गिरावट आई, लेकिन इस सफलता के सूत्रधारों को बेरहमी से पीटा गया। चिकित्सा देखभाल प्रदान करते समय अनपेक्षित दुर्घटनाओं के लिए डॉक्टरों पर हत्यारे के रूप में मुकदमा चलाया जाता है, मानवीय सीमाओं से परे 24 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, अदालतों में अत्यधिक मुआवजे से सम्मानित किया जाता है। देश के डॉक्टरों के प्रयासों से खसरा और पोलियो जैसी बीमारियाँ खत्म हो गई हैं, प्लेग और हैजा गायब हो गए हैं। कुष्ठ रोग, मलेरिया और तपेदिक विलुप्त होने के कगार पर हैं। 


बाल मृत्यु दर को कम करने की सफलता में भाग लेते हुए देश में बाल रोग विशेषज्ञों के माध्यम से टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। प्रसूति विशेषज्ञ सुरक्षित गर्भावस्था एवं प्रसव के माध्यम से मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। 1598 आधुनिक चिकित्सा डॉक्टरों के बलिदान के कारण समय रहते कोविड 19 पर काबू पा लिया गया। कारगिल युद्ध में 500 सैनिकों ने अपनी जान गंवाई और यह कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें याद करता है। लेकिन कोविड युद्ध में देश के लिए मर मिटने वाले डॉक्टरों को यह सम्मान नहीं मिला, यह अन्याय नहीं तो और क्या है?
-इस देश का हर डॉक्टर हिंसा के नश्वर भय में जी रहा है।
  • डॉक्टर लगातार डर के साये में हैं।
  • डॉक्टर अमानवीय काम के बोझ तले दबे हैं, तनाव का स्तर ऊंचा है, आत्महत्या की दर ऊंची है।
  • देश की सेहत का ख्याल रखते-रखते डॉक्टर कम उम्र में ही दिल की बीमारी का शिकार हो रहे हैं।
  • डॉक्टरों के ख़िलाफ़ हिंसा लेकिन आरोपियों को सज़ा न मिलना सिस्टम के ख़राब होने को दर्शाता है.

• इस देश में सोनोग्राफी फॉर्म न भरने पर डॉक्टरों को भ्रूण हत्या की सजा दी जाती है। केवल डॉक्टर ही ऐसी बाधाओं के गुलाम क्यों हैं?

अनुचित! अनुचित!!

ऐसा लगता है कि आजादी के बाद इस देश में डॉक्टरों को नागरिकों को मिलने वाले अधिकारों से वंचित रखा गया है। स्वास्थ्य सेवा का औद्योगीकरण एक नीतिगत त्रुटि है। हम सरकार की अपर्याप्तताओं और अनियमितताओं के बारे में कभी शिकायत नहीं करते।

हम न तो हत्यारे हैं और न ही व्यापारी!
नहीं, हम गुंडों के गिरोह हैं!!
हम 'सॉफ्ट टारगेट' नहीं हैं!
कोई दोयम दर्जे का नागरिक नहीं!!
सहमति से हम पर शासन करो!
अन्यथा अन्याय का प्रतिकार होगा!!

डॉ.आर.वी.अशोकन
राष्ट्रीय अध्यक्ष: इंडियन
 मेडिकल एसोसिएशन

*वृत्तविशेष सहयोग
डॉ.रविंद्र कुटे 
माजी अध्यक्ष
आई एम ए महाराष्ट्र राज्य 

*संकलन
समता न्यूज नेटवर्क, श्रीरामपूर - 9561174111
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