नाम है रमेश जेठे,
मगर पहचान नाम से नहीं,
काम से बनती है।
मंजिल कितनी दूर है,
इसकी फिक्र नहीं मुझे,
मैं तो वो मुसाफिर हूँ,
जो रास्तों से भी
रिश्ते बना लेता है।
रमेश जेठे सर
कभी धूप मिली,
कभी छांव मिली,
कभी अपनों की भीड़ में
तन्हाई मिली।
फिर भी चेहरे पर शिकन नहीं,
क्योंकि मैंने जिंदगी से
शिकायत नहीं, सीख ली है।
जिसने जैसा समझा,
मैंने उसे वैसा ही रहने दिया,
किसी के दिल में
अपनी जगह बनाने के लिए
कभी खुद को नहीं बदला।
मेरे शब्दों में ताकत है,
तो इसलिए नहीं कि मैं बड़ा हूँ,
बल्कि इसलिए कि
मैंने जिंदगी को
बहुत करीब से देखा है।
जो दर्द मिला,
उसे आवाज बना दिया,
जो सच दिखा,
उसे कलम बना दिया,
और जो अन्याय दिखा,
उसके सामने
चुप रहना छोड़ दिया।
कुछ लोग साथ चलते हैं
मंजिल तक पहुँचने के लिए,
कुछ लोग बीच रास्ते में
हाथ छोड़ देते हैं।
मैंने दोनों को देखा है,
इसलिए अब
भीड़ नहीं, भरोसेमंद रिश्ते पसंद हैं।
मेरी दौलत कोई महल नहीं,
मेरी कमाई कोई खजाना नहीं,
मेरे पास जो लोग
दिल से जुड़े हैं,
बस वही मेरी असली पूंजी हैं।
मैं गिरा भी हूँ,
संभला भी हूँ,
कभी खुद से हारा भी हूँ,
मगर हर बार उठकर
जिंदगी से यही कहा है—
“तू चाहे जितनी परीक्षा ले,
मैं हार मानने वालों में से नहीं।”
ना शोहरत की भूख है,
ना दुनिया को दिखाने की चाहत,
बस इतना चाहता हूँ—
जब कभी मेरा नाम आए,
तो किसी के चेहरे पर
इज्जत की एक मुस्कान जरूर आए।
क्योंकि रमेश जेठे
सिर्फ एक नाम नहीं,
एक सफर है...
दर्द से निकला हुआ,
संघर्ष से निखरा हुआ,
सच के रास्ते पर चला हुआ,
और अपनों के लिए
आज भी दिल से खड़ा हुआ।
नाम याद रहे या न रहे,
मगर मेरी बात याद रखना—
इंसान की असली पहचान
उसके पास क्या है, इसमें नहीं...
बल्कि उसके कारण
किसी का जीवन कितना बदला,
इसमें होती है। 🙏
रमेश जेठे

